२०२२०८०७

स्वयंसेवकों का यही एक सपना

स्वयंसेवकों का यही एक सपना ।
बने कार्यकर्ता बढे देश अपना ॥ धृ ॥ 

कोई श्यामवर्णी कोई गौर वर्णी
कोई शांतभावी कोई क्रोधकर्णी ।
सभी मित्र बनकर करे काम मिलकर
कोई हो नवागत तो कोई पुराना ॥ १ ॥

न पूर्वाग्रही हो न हो आत्मभावी
हृदय मन खुला हो विवेकी स्वभावी ।
विचारों में स्थिरता वचन में मधुरता
परायों व अपनों की निंदा से बचना ॥ २ ॥

उमंगी रहे हम उमंगी हो साथी
गति भी रहे आपसी मेल खाती ।
अकेले ना हों हम यही ध्यान हरदम
कदम से कदम को मिलाकर ही चलना ॥ ३ ॥

हो चिंतन हमारा सदा दूरगामी
मगर कार्यशैली हो एक एक कदमी ।
सभी काम भारी हो परिणामकारी
सफलता मिलेगी यही भाव भरना ॥ ४ ॥

वाचन मनन और अनुभव कथन से
रखे अद्यतन ज्ञान बौद्धिक यतन से ।
सदा स्वस्थ हों और रहें व्यस्त भी हम
समयदान क्षमता बढाते ही रहना ॥ ५ ॥

https://www.youtube.com/watch?v=noWkmVPwcBI&t=21s

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