२०२२०६१५

यह राष्ट्र विजयी हो हमारा

सार्वजनिक कार्यक्रमात पूज्य सरसंघचालकांच्या व्याख्यानापूर्वी हे गीत गायले गेलेले आहे.

राष्ट्रभक्ति ले हृदय में हो खडा यदि देश सारा ।
संकटों पर मात कर यह राष्ट्र विजयी हो हमारा ॥धृ॥

क्या कभी किस ने सुना है, सूर्य छिपता तिमिर भय से ।
क्या कभी सरिता रुकी है, बाँध से वन पर्वतों से ।
जो न रुकते, मार्ग चलते, चीर कर सब संकटॊं को ।
वरण करती कीर्ति उनका तोडकर सब असुर दल को ।
ध्येय मंदिर के पथिक को कण्टकों का ही सहारा ॥१॥ 

हम न रुकने को चले है, सूर्य के यदि पुत्र है तो ।
हम न हटने को चले है, सरित की यदि प्रेरणा तो ।
चरण अंगद ने रखा है, आ उसे कोई हटाये ।
दाहकता ज्वालामुखी यह, आ उसे कोई बुझाये ।
मृत्यु की पीकर सुधा हम, चल पडेंगे ले दुधारा ॥२॥ 

ज्ञान के विज्ञान के भी, क्षेत्र में हम बढ चलेंगे ।
नील नभ के रूप के नव अर्थ भी हम कर सकेंगे ।
भोग के वातावरण में, त्याग का सन्देश देंगे ।
दास्य के घन बादलों से, सौख्य की वर्षा करेंगे ।
स्वप्न यह साकार करने, संघटित हो हिन्दु सारा ॥३॥


कोणत्याही टिप्पण्‍या नाहीत:

टिप्पणी पोस्ट करा